दीपावली के दिन इन विधि विधानों से करें लक्ष्मी-गणेश का पूजन

by Mahima Bhatnagar

दीपावली हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। और दिवाली के साथ कई मान्यताएं जुडी हैं। दिवाली का त्यौहार पूरा हिन्दुस्तान बहुत धूम-धाम से मनाता है। दिवाली का त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन भगवान् गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। साथ ही इस दिन भगवान् कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस वर्ष यह त्यौहार 27 अक्टूबर को मनाया जायेगा। इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 27  अक्टूबर को पढ़ रही है।

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दिवाली का महूर्त:

  • शाम 7:15 मिनट से 8:36 मिनट तक
  • प्रदोष काल– शाम 6:04 मिनट से 8:36 मिनट तक
  • वृषभ काल– शाम 7:15 मिनट से 9:15 मिनट तक

दिवाली के दिन चौघड़िया:

  • दोपहर 1:48 से 3:13 मिनट तक

Deepawali

अब बात करते हैं कि दिवाली की पूजा कैसे की जाये:

  • दिवाली के दिन भगवान् गणेश और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
  • दीपावली के दिन शाम के समय चौकी बिछाएं और उस पर गंगाजल छिड़कें।
  • भगवान् गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा के साथ कुबेर यन्त्र भी पूजा में रखें।
  • पूजन स्थल पर एक तांबे का कलश पानी से भर कर रखें। अगर आपके पास तांबे का कलश नहीं है तो साधारण स्टील का कलश भी रख सकते हैं।
  • इसके बाद कलश पर स्वास्तिक बनाएं एवं रोरी से श्री लिखें और मोली से कलश के मुँह पर मोली से पांच गांठे बांध लें।
  • अब आम के सात पत्ते लें और पूजा स्थल पर बांध दें। साथ ही पूजा स्थल पंच मेवा, फल, गुड़, फूल, घी, मिठाई इत्यादि भी रखें।
  • माँ लक्ष्मी को कमल का फूल बहुत पसंद है तो माँ लक्ष्मी को कमल का फूल अर्पण करें।

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Deepawali

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  • अब घी या तेल के पाँच दीपक लगाएं एवं एक बड़ा दीपक जलाएं।
  • अब माँ लक्ष्मी और भगवान् गणेश की आरती करें। इस दिन कपूर आरती जरूर लगाएं और पूरे घर में आरती घुमाएं।
  • पूजा के समय घर के गहने, बहीखाते एवं पैसों को रखें एवं उनकी भी पूजा करें। इससे सम्पन्नता बढ़ती है।
  • इसके बाद जो दीये हैं उनको भी पूजा स्थल पर रखें एवं सभी चीज़ों की पूजा करें।
  • सभी दीयों को घर के हर एक कोने में रखें। ध्यान रहे कि घर के किसी भी कोने में अँधेरा न रहे।
  • इसके बाद भगवान् का आशीर्वाद लेकर प्रसाद सबको दें एवं खुद भी ग्रहण करें।
  • गाय, कुत्ते और पूजा के लिए भोज बनाएं। भगवान् के लिए बनाये गए भोजन से भगवान् को भोग लगाएं एवं प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। एवं कुत्ते और गाय के लिए जो भोग बनाया है वह उन्हें खिलाएं और उनसे आशीर्वाद लें।
  • इस तरह से भगवान् का आशीर्वाद लें और सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

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Deepawali

इस विधि के अनुसार दिवाली की पूजा करें और आप अपने अनुसार प्रसाद सामग्री पूजा में रख सकते हैं जितना आपका सामर्थ्य है। यह त्यौहार बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है और हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसमें सबसे ज्यादा रौनक देखने को मिलती है। एवं भारतीय परंपरा देखने को मिलती है।

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