धनतेरस का क्या है महत्व, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

by Mahima Bhatnagar
Dhanteras

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि वाले दिन धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। यह धन की देवी और देवता का त्यौहार है। इस दिन सोने चांदी या कुछ नया सामान खरीदना शुभ माना जाता है। सामान खरीदने के लिए कुछ विशेष महूर्त होते हैं।

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धनतेरस की पूजा इस प्रकार करें

  • एक मिट्टी का हाथी बनाएं एवं धन्वन्तरी भगवान् की फोटो स्थापित करें।
  • ताबें की आचमनी लें एवं उससे जल आचमन करें।
  • भगवान् गणेश का ध्यान करते हुए पूजन करें।
  • हाथ में पुष्प लेकर भगवान् धन्वन्तरी को पुष्प अर्पण करें।
  • किसी भी मंत्र को लें जो भगवान् धन्वन्तरी को समर्पित हो उसका जाप करें।
  • जाप के बाद आरती करें, भोग लगायें एवं सबको प्रसाद दें।
  • जो नयी वस्तु ली हो उसकी आरती उतारें एवं पूजा के बाद ही उसे उपयोग में लें।

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इस वर्ष धनतेरस का त्यौहार 25 अक्टूबर को मनाया जायेगा, इस दौरान पूजा के महूर्त इस प्रकार हैं:

  • धनतेरस पूजन मुर्हुत: शाम 07:08 बजे से रात 08:14 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 05:39 से रात 08:14 बजे तक
  • वृषभ काल: शाम 06:51 से रात 08:47 बजे तक
  • त्रयोदशी तिथि आरंभ: सुबह 07:08 बजे (25 अक्टूबर 2019) से
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: दोपहर 03:46 बजे, (26 अक्टूबर 2019)  तक

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25 एवं 26 दो दिन यह त्यौहार मनाया जायेगा। इस पूजा में भगवान् धन्वन्तरी के साथ-साथ माँ लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। एवं यह त्यौहार हिन्दू धर्म का विशेष त्यौहार माना जाता है। एवं इस दिन लोग नयी वस्तु अवश्य खरीदते हैं एवं भगवान् से धन की बढ़त के लिए प्रार्थना करते हैं। धनतेरस की पूजा अगर शाम को की जाती है तो इसका विशेष फल प्राप्त होता है। वैसे तो पूजा के महूर्त होते हैं लेकिन अमृत पक्ष में पूजा करना और सामान खरीदना विशेष फलदायी होती है।

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भगवान् कुबेर को सफ़ेद मिठाई को भोग लगाना चाहिए जिससे भगवान् कुबेर प्रसन्न होते हैं एवं घर में धन धान्य की बढ़त होती है। साथ ही पीली वस्तु या मिठाई का भी भोग लगा सकते हैं एवं पुष्प, दीप से भगवान् को प्रसन्न करना चाहिए।