ये किताबें पढ़ोगे तो बनोगे बिहार की राजनीति का ज्ञाता…

by TrendingNews Desk
राजनीति

यह बात सोलह आने सच है कि राजनीति का ज्ञान तो बिहारियों के दिमाग में कूट-कूट कर भरी हुई है। मौसम चाहे चुनावी हो या कोई भी आप यहां के किसी भी पान की गुमटी वाले या फिर चाय की दुकान वाले से कभी भी बिहार की राजनीति पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। कहने का मतलब यह है कि पॉलिटिक्स के नॉलेज में हम बिहारी कभी भी खुद को किसी से कम नहीं आंकते। हमारे यहां घर से लेकर गली और इन गलियों से लेकर मुहल्ले के हर चौक – चौराहे पर आए दिन आपको कुछ लोग राज्य या देश की सियासत पर कुछ कहते-सुनते जरुर नजर आ जाएंगे। दिलचस्प यह भी है कि राजनीति जैसे विषय पर हमारे यहां बच्चे, बूढ़े और जवान सभी के पास कहने के लिेए या फिर अपनी राय व्यक्त करने के लिेए कुछ ना कुछ ज्ञान जरूर होता है। बात पॉलिटिकल नॉलेज की हो रही है तो आज biharmedia.com का यह विशेष अंक आपके राजनीति शास्त्र के ज्ञान को और आगे बढ़ाने में काफी अहम साबित हो सकता है। दरअसल आज हम बिहार की राजनीति और यहां के राजनीतिज्ञों पर आधारित कुछ ऐसी किताबों और उनके लेखकों के बारे में आपको बताएंगे जिन्हें पढ़ने के बाद आपका राजनीतिक ज्ञान का भंडार और भी प्रभावशाली हो जाएगा।

1- सबअल्टर्न साहेब

बिहार की राजनीति पर कोई बात चले और लाालू प्रसाद यादव का जिक्र ना हो ऐसा नामुमकिन है। यकीनन पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव आधुनिक बिहार में पिछड़ों के नायक के तौर पर जाने जाते हैं। तो अगर आपको सियासत के ‘किंगमेकर’ कहे जाने वाले लालू प्रसाद के बारे में जानना है तो ‘शंकरशन ठाकुर’ की किताब ‘सबअल्टर्न साहेब’ इस दिशा में आपके लिए काफी मददगार साबित होगी। पत्रकार शंकरशन ठाकुर की यह किताब 2001 में सबसे पहले ‘द मेकिंग ऑफ लालू यादव: द अनमेकिंग ऑफ बिहार’ नाम से छपी थी, बाद में इसका अपडेटेड वर्जन ‘सबअल्टर्न साहेब’ नाम से आया। इस किताब के माध्यम से आपको पता चलेगा कि ‘लालू ब्रांड’ बिहार की राजनीति में क्यों और कितना प्रभावी है।

यह भी पढ़ें-पत्रकारिता की ‘गोली’, दाभोलकर, पानसरे, राजदेव, रामचंद्र और अब गौरी

2- सिंगल मैन: द लाइफ एंड टाइम ऑफ नीतीश कुमार ऑफ बिहार

बिहार में चौक-चौरहे पर अक्सर आपको लोग ‘सुशासन बाबू’ के बारे में चर्चा करते हुए नजर आ जाएंगे। जी हां, यह नीतीश कुमार के कार्यशैली का ही कमाल है कि यहां लोग उन्हें ‘सुशासन बाबू’ के नाम से ही बुलाना पसंद करते हैं। नीतीश कुमार का यह नाम विख्यात है। जब कभी आप ‘सिंगल मैन : द लाइफ एंड टाइम ऑफ नीतीश कुमार ऑफ बिहार’ नाम की किताब पढ़ेंगे तो आप यह जानेंगे कि बिहार में लालू के दौर के बाद बिहार ने क्या-क्या परिवर्तन देखे हैं। इंदिरा गाँधी के आपातकाल के खिलाफ हुए एक आंदोलन से तप कर निकले नीतीश और लालू सरीके बड़े नेताओं कहानी इस किताब के माध्यम से आपको जानने को मिलेगी।

यह भी पढ़ें-‘ऐसी वाणी बोलिए कि जम के झगड़ा होए’!, बिहार के बदजुबान नेताओं पर स्वतंत्र पत्रकार निशांत नंदन की टिपप्णी- पढ़ें

3-मुस्लिम पॉलिटिक्स इन बिहार: चेंजिंग कॉन्टोर्स ऑफ बिहार
इस किताब के लेखक हैं मोहम्मद सज्जाद। इस किताब के माध्यम से आप जानेंगे कि मुस्लिम वोट बिहार की राजनीति में कितने अहम हैं।बिहार में पिछड़े मुसलमानों की तादाद ज्यादा है और वह अपना अलग राजनीतिक महत्व रखते हैं। राज्य की सियासत में इनका महत्व काफी ज्यादा है। दुर्लभ स्रोतों और अब तक अप्रमाणित कुछ उर्दू टेक्स्ट के जरिये कई घटनाक्रमों का बारीक विश्लेषण इस किताब के माध्यम से किया गया है।

यह भी पढ़ें-ये हैं वो ‘बिहारी व्यंजन’ जिसकी दुनिया है दिवानी…

4-डेमोक्रेसी अगेंस्ट डेवलपमेंट

बिहार का कोई भी सियासी दल ‘जाति फैक्टर’ को यहां नकार नहीं सकता। नब्बे के दशक से बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी ‘पिछड़ी जाति’ वाले के पास ही रही है। बिहार की राजनीति को समझना है तो जातीय समीकरणों की पड़ताल करना जरुरी है। जातीय समीकरण व विकास के बीच सम्बन्ध दर्शाती यह किताब बेहद ही दिलचस्प है।

5-नीतीश कुमार एंड द राइज ऑफ बिहार

यकीनन राज्य की जाति आधारित राजनीति को विकास आधारित राजनीति में कुछ हद तक ले जाने का श्रेय अगर किसी को जायेगा तो वे हैं नीतीश कुमार। इस किताब के माध्यम से आप जानेंगे कि कैसे नीतीश कुमार राजनीतिक तौर पर उभरते गए। पत्रकार अरुण सिन्हा ने इस किताब के माध्यम से बताया है कि कैसे नीतीश लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े और अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाते गए। उनके विकास मॉडल को जानने के लिए यह पुस्तक बेहतर विकल्प है।

यह भी पढ़ें-जानिए पटना पुस्तक मेले का इतिहास और इस बार का ‘पिंक’ कनेक्शन…

6-रूल्ड ऑर मिसरूल्ड
पत्रकार संतोष सिंह की यह किताब नब्बे के दशक में कांग्रेस के पतन के बाद की राजनीति के बारे में अच्छे से बताती है। इस किताब के माध्यम से आप बिहार के राजनीतिक दिग्गजों की दास्तान अच्छे से समझ पाएंगे। इस किताब के माध्यम से आप बिहार के राजनीतिक दिग्गज जयप्रकाश नारायण,कर्पूरी ठाकुर के दौर से लेकर रणबीर सेना के उदय की कहानी जान पाएंगे।