रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी को भारत में मिली मंजरी

by Mahima Bhatnagar
वैक्सीन

नई दिल्ली। कोरोना के बढ़ते मामले लगातार लोगों को परेशान कर रहे हैं। वो इसलिए क्योंकि मामले हर 24 घंटे में बदल रहे हैं। जिसके कारण सरकार ही नहीं बल्कि आम जनता की भी हालत खराब है। कही बेड नहीं हैं, तो कहीं वैक्सीन की कमी। ऐसा लग रहा है जैसे हर तरफ से परेशानियों ने घेर लिया है। जिसके कारण किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा। वहीं इन परेशानियों के बीच एक खबर आई है कि, रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी को भारत में मंजूरी मिल गई है।

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स्पूतनिक-वी के मिली भारत में मंजूरी

रूसी वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिल गई है। जिसके कारण अब ये तीसरी डोज के जरिए लोगों को लगाई जाएगी। फिलहाल इसके तीसरे फेज का ट्रायल चल रहा है। जिसके अप्रूवल के बाद इसकी डोज लोगों को लगाई जाएगी। ऐसे में अब कोरोना की दो डोज नहीं बल्कि 3 डोज लगाई जाएगी।

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कोविडशील और कोवैक्सीन से कितनी अलग है स्पूतनिक-वी

  • फेज 3 ट्रायल के अंतरिम नतीजों में Sputnik V वैक्‍सीन की एफेकसी 91.6% पाई गई है।
  • भारत बायोटेक की Covaxin ने फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल में 81% की एफेकसी हासिल की थी।
  • सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की Covishield की एफेकसी 62% दर्ज हुई थी। हालांकि डेढ़ डोज देने पर एफेकसी 90% तक पहुंच गई।

क्‍या है डोज पैटर्न और स्‍टोरेज का तरीका?

  • Covishield की दो डोज 4-8 हफ्तों के अंतराल पर दी जाती हैं। इसे स्‍टोर करने के लिए सब जीरो तापमान (शून्‍य से कम) की जरूरत नहीं है।
  • Covaxin की दो डोज 4-6 हफ्तों के अंतराल पर दी जाती हैं। इसे भी 2-8 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान पर स्‍टोर कर सकते हैं।
  • Sputnik V के डिवेलपर्स के अनुसार, इसे भी 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच स्‍टोर किया जा सकता है। यह वैक्‍सीन भी दो डोज में दी जाती है।

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कीमत और उपलब्‍धता का क्‍या है सीन?

  • Covishield और Covaxin, दोनों ही सरकारी अस्‍पतालों में मुफ्त में लगाई जा रही हैं। प्राइवेट अस्‍पताल में जाने पर 250 प्रति डोज का शुल्‍क लिया जा रहा है। सरकार सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक को 150 रुपये प्रति डोज दे रही है।
  • Sputnik V की भारत में कीमत अबतक स्‍पष्‍ट नहीं है। विदेश में यह टीका 10 डॉलर प्रति डोज से कम है। RDIF का शुरुआती प्‍लान इसे रूस से आयात करने का है। ऐसे में कीमत ज्‍यादा हो सकती है।
  • एक बार इस वैक्‍सीन का प्रॉडक्‍शन भारत में शुरू हो जाए तो कीमतें काफी कम हो जाएंगी। डॉ रेड्डी लैबोरेटरीज से 10 करोड़ डोज बनाने की डील हुई है। इसके अलावा RDIF ने हेटरो बायोफार्मा, ग्‍लैंड फार्मा, स्‍टेलिस बायोफार्मा, विक्‍ट्री बायोटेक से 85 करोड़ डोज बनाने का भी करार कर रखा है।